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Fact Check: जानिए, मुंगेर गोलीकांड में एसपी लिपि सिंह को हटाने में क्यों देर हुई

मुंगेर मामले में भाजपा की चुप्पी और नीतीश का मुंह बंद रखना गठबंधन को चुनाव में नुकसान पहुंचा सकता है. पहले चरण के मतदान पर इसका असर भी दिखा.

बिहार चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले मुंगेर में गोलियां की तड़तड़ाहट का असर मतदान पर भी दिखा. मां दुर्गा के भक्तों पर बरसा पुलिससिया कहर नेताओं की जुबान से आग के गोलों की तरह बरसा. तेजस्वी यादव, चिराग पसवान और कांग्रेसी ऐसे हालात में सरकार पर तीर छोड़ने में बिल्कुल भी नहीं चूके लेकिन इस घटना की आर्टिस्ट बताई जा रही मुंगेर की एसपी लिपि सिंह का बाल भी बांका नहीं हुआ. हालांकि, मतदान के अगले दिन मुंगेर फिर हिंसा की आग में जल उठा और आंच एसपी तक पहुंच गई. गुरुवार को चुनाव आयोग ने भी एसपी लिपि सिंह और डीएम राजेश मीणा को हटा दिया.

आइए सबसे पहले नजर डालते हैं मतदान से पहले हुई उस डरा देने वाली घटना पर. 26 अक्टूबर यानी सोमवार रात को पटना से करीब 200 किलोमीटर दूर मुंगेर में मां दुर्गा के भक्तों पर पुलिसिया कहर बरपा. घटना दीन दयाल चौक के पास मूर्ति विसर्जन से पहले हुई. इस घटना में एक युवक की मौत हो गई जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. मुंगेर में बरसे पुलिसिया कहर की वीडियो सामने आने के बाद लोगों के दिल दहल गए.

मतदान से ठीक एक दिन पहले सोशल मीडिया पर मुंगेर की कई वीडियो वायरल हुईं. इनको देखकर जहां लोगों के दिल दहल गए, वहीं गुस्से में चेहरे भी लाल हो गए. वीडियो में दिख रहा था कि मां दुर्गा की मूर्ति के पास बैठे भक्तों पर पुलिस व सुरक्षा बल के जवान ऐसे लाठियां बरसा रहे थे जैसे वे कोई अपराधी हों. एक अन्य वीडियो में युवक का गोली लगा शव दिखाया गया, जिसके सिर में गोली मारी गई थी. कुछ वीडियो में पुलिस के लाठीचार्ज के बाद मची भगदड़ की तस्वीरें भी दिखीं.

नाराजगी इतनी बढ़ी कि ट्विटर यूजर्स ने इस घटना को जलियावालां बाग से जोड़ दिया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनरल डायर तक की संज्ञा दे डाली गई. गोलीकांड के लिए मुंगेर की एसपी लिपि सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया. लिपि सिंह को हटाने की भी मांग की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि, पुलिस व प्रशासन की तरफ से सफाई दी गई कि इसमें असामाजिक तत्वों का हाथ है. पथराव और फायरिंग में कई पुलिसवाले घायल हुए हैं. भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को एक्शन लेना पड़ा. उन्होंने पुलिस की गोली लगने से युवक की मौत के आरोप को भी नकार दिया.

बीबीसी के मुताबिक, नवरात्र के एक दिन पहले से विसर्जन के समय को लेकर विवाद चल रहा था. एक तो कोरोना और उपर से चुनाव, इसको देखते हुए श्रद्धालुओं को मूर्ति विसर्जन के लिए 25 अक्टूबर का समय दिया गया था. बाद में प्रशासन और पूजा समितियों में 26 अक्टूबर की सहमति बनी. घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने पुलिस व प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. मूर्ति के पास बैठै बेकसूर लोगों पर लाठियां बरसाई गईं. कई राउंड फायरिंग की आवाजें आईं. पुलिस द्वारा हथियार बरामद करने पर लोगों का कहना है कि वे विसर्जन के समय बंदूकें लेकर क्यों जाएंगे.

अब गोली किसने भी चलाई हो लेकिन 12वीं के छात्र अनुराग पोद्दार की जान चली गई. चार बहनों के इकलौते भाई अनुराग के घर से अब महिलाओं के रोने और चींखने की आवाज ही आ रही है. अनुराग के पिता का कहना है कि चुनाव नहीं होता तो यह घटना भी नहीं होती. मेरे बेटे की जान भी बच जाती. इतना ही नहीं कई परिवारों के बच्चे गायब हैं, जिनकी जानकारी पुलिस भी नहीं दी रही है.

Munger Firing Update
Source: BBC

अब अगर यह घटना उत्तर प्रदेश में होती तो अब तक तो पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पर कार्रवाई हो चुकी होती. अब चूंकि बिहार में चुनाव चल रहे हैं. आचार संहिता लागू है तो बिना चुनाव आयोग की अनुमति कोई कार्रवाई करना मुमकिन नहीं है. कार्रवाई का अधिकार केवल चुनाव आयोग को है. इसके अलावा लिपि सिंह के पिता आरपीएस सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खास माने जाते हैं. राज्यसभा सांसद आरपीएस सिंह का नाता जदयू से है. वह भी आईपीएस रह चुके हैं. इस नाते भी लिपि सिंह को नीतीश कुमार का आशीर्वाद प्राप्त है. फिर भाजपा के कुछ नेताओं को छोड़ दें तो वह भी इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है.

मतदान के अगले दिन गुरुवार को मुंगेर से अद्र्धसैनिक बल के जवान चले गए. इसके बाद भीड़ फिर भड़क उठी और निशाना बने पुलिसकर्मी. नाराज लोगों ने बासुदेवपुर पुलिस चौकी को फूंक दिया. निशाना एसपी कार्यालय को भी बनाया गया. गुरुवार को चुनाव आयोग भी हरकत में आ गया और एसपी व डीएम को हटा दिया गया.

Munger Firing News in hindi
Source: Dainik Bhaskar

मुंगेर मामले में भाजपा की चुप्पी और नीतीश का मुंह बंद रखना गठबंधन को चुनाव में नुकसान पहुंचा सकता है. पहले चरण के मतदान पर इसका असर भी दिखा. मुंगेर में सोमवार रात जहां पुलिस की लाठियां चली थीं, वहां सड़कों से लेकर पोलिंग सेंटर तक खामोशी थी. बीबीसी के अनुसार, इस घटना को राजनीतिक साजिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है. भाजपाइयों का आरोप है कि इस घटना में जदयू का हाथ है. वहां भाजपा के वोटर ज्यादा है तो उम्मीदवार को हराने के लिए ऐसा कराया गया है जबकि नीतीश की पार्टी वाले कह रहे हैं कि इसमें भाजपा की साजिश है. ऐसा इसलिए किया गया जिससे यह मैसेज जाए कि मुख्यमंत्री अधिकारियों से गलम काम करा रहे हैं. खैर इसमें दोषी कौन है और कौन नहीं, यह तो समय बताएगा लेकिन इसका असर बाकी के दो चरणों पर भी दिख सकता है. इससे भाजपा व जदयू को नुसकान हो सकता है.

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