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Fact Check: उर्दू में भी लिखा है श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेलवे स्टेशन का नाम, जानिए क्या है वजह

ट्विटर यूजर ने श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेलवे स्टेशन का नाम उर्दू में लिखे जाने पर आपत्ति जताई. उनका कहना है कि माता वैष्णो देवी उर्दू भाषा मे लिखने की क्या जरूरत थी, मुसलमान तो माता रानी के दरबार मे दर्शन को जाते नहीं हैं.

देश के लगभग हर शख्स ने ट्रेन में यात्रा तो जरूर की होगी, नहीं तो उसने स्टेशन की शक्ल तो जरूर देखी होगी. रेलवे स्टेशन का नाम तीन भाषाओं में लिखा होता है. इनमें से हिंदी और अंग्रेजी तो कॉमन हैं लेकिन तीसरी भाषा अक्सर उर्दू दिखाई देती है. कुछ लोगों ने इसको लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. इसी साल जनवरी में उत्तराखंड के रेलवे स्टेशनों पर लगे बोर्ड से भी उर्दू की जगह संस्कृत का इस्तेमाल करने की बात उठी थी. ट्विटर पर श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेलवे स्टेशन की भी एक फोटो वायरल हो रही है. इस पर उर्दू में ​नाम लिखा होने पर लोगों ने आपत्ति जाहिर की है.

रजनी ठाकुर हिंदुत्ववादी @iSinghRajni ने 22 सितंबर को श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेलवे स्टेशन की फोटो ट्वीट की और लिखा,

#मातावैष्णोदेवी उर्दू भाषा मे लिखने की क्या जरूरत थी, मुसलमान तो माता रानी के दरबार मे दर्शन को जाते नहीं, इसको जल्दी से जल्दी हटाया जाये और उर्दू की जगह संस्कृत भाषा मे लिखा जाए, ताकि भारत की मूल भाषा का प्रयोग कम से कम मंदिरों और हिंदुस्तान के ऐतिहासिक धरोहरों पर दिखाई दे!!

अब तक 1300 से ज्यादा लोग इसको रिट्वीट कर चुके हैं. कमेंट में लगभग सबने इस ट्वीट का समर्थन किया है.

Sri Mata Vaishano Devi Katra Railway Station

पोस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें.

The News Postmortem ने इस पोस्ट की पड़ताल शुरू की तो सबसे पहले इस फोटो की हकीकत तलाश की. गूगल पर सर्च करने पर हमें कटड़ा रेलवे स्टेशन की कई फोटो मिलीं. इनमें उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में लिखा है, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा. मतलब यह फोटो सही है. रेलवे स्टेशन का नाम उर्दू में भी लिखा हुआ है.

Sri Mata Vaishno Devi Katra Railway Station Image

अब सवाल उठता है आखिर क्यों. क्यों रेलवे स्टेशनों पर तीन भाषाओं में स्टेशन का नाम लिखा हेाता है? क्या हिंदी व अंग्रेजी के अलावा तीसरी भाषा उर्दू है? इसके लिए हमने गूगल पर छानबीन की. इसमें Quora में हमें इसका जवाब मिला. भारतीय रेल में मुख्य यांत्रिक इंजीनियर
अनिमेष कुमार सिन्हा के अनुसार, रेलवे स्टेशनों पर तीन भाषाओं में नाम लिखे होते हैं लेकिन कई जगह केवल हिंदी और अंग्रेजी का ही इस्तेमाल हुआ है. तीसरी भाषा उर्दू हो, यह भी जरूरी नहीं है. पंजाब में तीसरी भाषा पंजाबी है जबकि गुजरात में गुजराती. मध्य प्रदेश और राजस्थान में केवल हिंदी और अंग्रेजी में नाम लिखे होते हैं.

Jaipur Railway Station Image
satna railway station
Jalandhar Railway Station Image
Chennai Central Railway Station Image

दरअसल, इसके लिए देश में तीन भाषाओं का फॉर्मूला लागू है. हिंदी और अंग्रेजी के अलावा उस राज्य की मान्य आधिकारिक भाषा को तीसरी भाषा के रूप में प्रयोग किया जाता है. मघ प्रदेश और राजस्थान में तीसरी मान्य आधिकारिक भाषा नहीं है इसलिए वहां केवल हिंदी और अंग्रेजी में नाम लिखा होता है. उत्तर प्रदेश, जम्मू—कश्मीर, दिल्ली, बिहार समेत कई राज्यों की मान्य आधिकारिक भाषा उर्दू है तो वहां उर्दू में भी नाम लिखा होत है जबकि चेन्नई में हिंदी व अंग्रेजी के अलावा तमिल का इस्तेमाल होता है.

Postmortem रिपोर्ट: उर्दू 70 साल से जम्मू—कश्मीर की आधिकारिक भाषा है. हालांकि, वहां उर्दू बोलने वाले मात्र 0.16 फीसदी ही हैं. राज्य की आधिकारिक भाषा होने की वजह से श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा रेलवे स्टेशन का नाम उर्दू में भी लिखा गया है.

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