Home Viral सच्चाई Fact-Check: 'दिनकर' के नाम पर वायरल कविता "ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं"...

Fact-Check: ‘दिनकर’ के नाम पर वायरल कविता “ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं” का सच

Fact-Check(द न्यूज़ पोस्टमार्टम): नववर्ष के मौके पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के नाम से एक कविता वायरल हो रही है कविता का शीर्षक है – ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं” जिसमें दावा किया जा रहा है कि इस कविता को रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा था।


वायरल दावे पर लोगों की प्रतिक्रियाएं : वायरल कविता को हर कोई अपने अंदाज में पेश कर रहा है और प्रतिक्रिया दे रहा है।एक फेसबुक यूजर ने इसे शेयर करते हुए लिखा-

ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं”

दूसरे फेसबुक यूजर की प्रतिक्रिया,

ट्विटर यूजर विकास शुक्ला ने ट्वीट करते हुए लिखा –
इस अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा लिखी गई कुछ पंक्तियों के साथ:

ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं,

है अपना ये त्यौहार नहीं।

है अपनी तो ये रीत नहीं,

है अपना ये व्यवहार नहीं।”

पड़ताल : यह रचना हिन्दी के प्रसिद्ध संस्थानो पर भी जमकर वायरल हुई लेकिन किसी नेे इसकी पुष्टि नहीं की। यह रचना किसकी है ??

जब द न्यूज़ पोस्टमार्टम ने इसकी पड़ताल की तो हमे हिन्दी मीडिया  वेबसाइट पर अकुुुर “आनंद” की टिप्पणी मिली, जहांं अंकुर ने लिखा –

संपादक महोदय नमस्ते ये रचना दिनकर जी की नहीं अपितु मेरी मौलिक रचना है –अंकुर आनंद१५९१/२१ आदर्श नगर , रोहतक .यदि प्रमाण चाहिए तो अपना व्हाट्स अप नंबर भेजें

ये मेरी मौलिक रचना है , कृपया संशोधन कर लें I अपना ईमेल बताएं , ताकि आपको प्रमाण भेजे जा सकें I
प्रस्तुत कविता रामधारी सिंह दिनकर जी की नहीं है I ये अंकुर ‘आनंद’ , १५९१/२१ , आदर्श नगर , रोहतक (हरियाणा ) की मौलिक रचना है I ये रचना दिनकर जी की किसी पुस्तक में नहीं मिलेगी “
…..

वहीं कविता मंच के ब्लाग पर भी हमें इससे सम्बन्धित एक टिप्पणी मिली। जिसमें लिखा था –
सोशल मीडिया में यह कविता महाकवि दिनकर जी के नाम से छाई हुई थी-मैंने भी अपने यु ट्यूब वीडियो में महाकवि दिनकर जी के नाम से इसको आवाज देते हुए अपनी कविता के तार जोड़े पर रोहतक से कवि अंकुर आनंद ने मेरे वीडियो लिंक के कमेंट बॉक्स पर इस रचना को अपना बताया और उन्होंने यहां पर भी इस बात को उठाया है।दूसरे कमेंट्स भी यह बता रहे है कि यह कविता दिनकर जी की नही है।गलत प्रचार की वजह से रचना किसी की औऱ नाम किसी का आ जाने से रचियता के अधिकार पर प्रहार होता है।इसलिए यहां पर विशेषकर साइट ,ब्लॉग पर विशेष सतर्कता आवश्यक है।रचना अपने आप मे भावों से परिपूर्ण व एक बड़े सन्देश को देती हुई है औऱ अब तो कवि दिनकर के नाम के स्पर्श से परिपूर्ण औऱ प्रचारित भी हो गई है।रचना के वास्तविक रचनाकार बधाई के पात्र है।संजय सनमसंपादक-फर्स्ट न्यूज़

indiaspeaksdaily की वेबसाइट पर भी हमें एक टिप्पणी मिली जिसमें कहा गया कि यह रचना दिनकर की नहीं बल्कि, अंकुर आनन्द की है।


आखिर में अंकुर के बारें जानकारी हासिल करके, इस कविता का सच निकल ही आया, कि यह रचना अंकुर “आनंद” की है न कि रामधारी सिंह “दिनकर” की।इस कविता के बारे में संशय का पैदा होना ,दिनकर की रचनाएं और भाषा शैली होना भी है, दिनकर का व्यक्तित्व भी इस कविता के करीब नही था।

पोस्टमार्टम : द न्यूज़ पोस्टमार्टम की पड़ताल में राष्ट्र कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी के नाम से वायरल कविता पर किया जा रहा दावा ग़लत साबित होता हैै।

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FACT CHECK : झूठ

Pratayksh Mishrahttps://thenewspostmortem.com/
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