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Fact Check: क्या पैगम्बर का कार्टून दिखाने पर जिस शख्स की हत्या हुई वो Refugees का स्वागत कर रहा है?

सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल कर ये दावा किया जा रहा है कि फ़्रांस में जिस शिक्षक की हत्या कट्टरपंथियों ने की कुछ साल पहले वो शरणार्थियों का स्वागत कर रहा था.

सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि ये फोटो उसी शख्स का है जिसका 16 अक्टूबर को फ़्रांस में गला काटकर आतंकियों ने हत्या कर दी थी. फोटो के साथ एक मैसेज भी है जिसमें लिखा है ये शख्स जिन शरणार्र्थियों का स्वागत कर रहा है उसे नहीं पता था कि वाही इसकी जान ले लेंगे.इस फोटो भाजपा नेता और पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर सुरेन्द्र पुनिया ने ट्विट किया है. हमारे व्हाट्सएप नम्बर पर हमारे पाठक ने ट्विट का स्क्रीनशॉट और शेयर किए जा रहे मैसेज को भेजकर सच्चाई का पता लगाने की बात कही.

भाजपा नेता और पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर सुरेन्द्र पुनिया ने 22 अक्टूबर को एक फोटो पोस्ट किया. जिसमें एक शख्स मास्क लगाए और refugees का स्वागत कर रहा है. इसमें उन्होंने तंज करते हुए मैसेज पोस्ट किया है कि

फ़ोटो में जो बीच में खड़ा है वो वही टीचर है जिसका एक जिहादी ने पेरिस में सर काट दिया था…कुछ साल पहले वो फ़्रांस में आने वाले Refugees का स्वागत कर रहा था पर उसे क्या पता था कि वो refugee उसी का गला काट देंगे ये उन लिबरांडुओं के लिये है जो भारत में रोहिंग्या को बसाना चाहते हैं

इस पोस्ट को चार हजार से ज्यादा लोग रिट्विट कर चुके हैं जबकि दस हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं.

चूँकि मीडिया रिपोर्ट में फ़्रांस में शिक्षक की हत्या 16 अक्टूबर को होने की पुष्टि है. हमने इस फोटो को रिवर्स इमेज पर सर्च किया तो हमें पता लगा  कि ये तस्वीर 17 अक्टूबर को good chance नामक संस्था ने पोस्ट की है. जबकि ट्विट में दावा है कि कुछ साल पहले refugees का स्वागत है वो गलत मालूम हुआ. क्यूंकि तस्वीर में सब लोग मास्क लगाए हुए हैं. यानि तस्वीर हाल फिलहाल की है.

Good chance के ट्विट से ये तय हो गया कि ये फोटो फ़्रांस की नहीं बल्कि इंग्लैंड की है. इंग्लैंड में फोकस्टोन नाम से सर्च करने पर हमें द गार्जियन अखबार 17 अक्टूबर की एक खबर मिली. जिसके मुताबिक वहां refugees को लेकर एक कार्यक्रम हुआ था. इस क्रायक्रम में 200 से अधिक लोग शामिल हुए थे.

वहीँ हमने सैमुअल पेटी की हत्या की खबर को सर्च किया तो अमर उजाला के मुताबिक उनकी हत्या 16 अक्टूबर को हुई थी. जबकि ये refugees वाला कार्यक्रम 17 को यानि उनकी हत्या के एक दिन बाद.वहीँ वायरल फोटो में दिख रहे शख्स और सैमुअल पेटी के चेहरे भी नहीं मिल रहे. साथ ही इंग्लैंड के फोटो को फ़्रांस की घटना से जोड़ा जा रहा है.

Postmortem रिपोर्ट:- सोशल मीडिया में जिस दावे के साथ फ़्रांस के शिक्षक की फोटो का दावा किया जा रहा है वो पूरी तरह फेक है, वायरल फोटो में इंग्लैंड का युवक है, जबकि शिक्षक की हत्या फ़्रांस में हुई है.

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