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#FactCheck रूस में #COVID19 की वैक्सीन बनने का दावा पूरी तरह सच नहीं

रूस की मेडिकल यूनिवर्सिटी ने कोरोना की वैक्सीन के सफल परीक्षण का दावा किया था.जो पूरी दुनिया के लिए एक ख़ुशी की खबर थी. भारतीय मीडिया में समाचार माध्यमों ने इस खबर को प्रमुखता से चलाया था. लेकिन अभी इस वैक्सीन के सभी चरण पूरे नहीं हुए हैं और हमारी पड़ताल में ये सामने आया कि इस वैक्सीन के अभी और विस्तृत परीक्षण बाकी हैं.

पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है, जिसमें अभी तक इसके लिए कोई कारगर वैक्सीन या फिर दवाई नहीं मिल पायी है. इसकी काट के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक दिन-रात जुटे हैं. ऐसे में 13 जुलाई को एक खबर तेजी से सभी मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हुई, जिसमें रुसी मेडिकल यूनिवर्सिटी सेचनोव द्वारा कोरोना वायरस का टीका बना लेने का दावा किया गया. ये रूस समेत पूरी दुनिया के लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं था, क्योंकि रूस टॉप चार कोरोना पीड़ित देशों में शामिल है. लेकिन क्या वास्तविकता में जो मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है, वह सही है भी या नहीं, हमने इसकी पड़ताल शुरू की.

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भारत में इस खबर को रूस के अधिकृत दूतावास के ट्विटर एकाउंट से ट्वीट किया गया, जिसमें ये दावा किया गया कि रूस की मेडिकल यूनिवर्सिटी सेच्नोवे ने COVID-19 का टीका सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इसमें रूस की न्यूज एजेंसी ताशा के हवाले से यह बताया गया है कि जिन वालंटियर्स पर टीके का परीक्षण किया जा रहा है, उन्हें 15 और 20 जुलाई को दो चरणों में छुट्टी दे दी गयी थी.

जब हमने सेचनोव यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर सर्च किया तो उसमें रशियन भाषा में खबर मिली. समाचार को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने के बाद पता चला कि 10 जुलाई को सौंपी गई रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इस वैक्सीन के अभी और परीक्षण बाकी है. अभी इसका ट्रायल और वालंटियर्स पर होगा. पहले चरण में 38 वालंटियर्स शामिल थे. लिहाजा यह तय हो गया कि अभी इस वैक्सीन के सभी चरण पूरे नहीं हुए.

यहां बता दें कि COVID-19 की वैक्सीन पर कई देशों में शोध चल रहा है, जिसमें कई जगह अब वैक्सीन अंतिम चरण में भी है. अभी तक किसी पर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO द्वारा मोहर नहीं लगाई गयी है. WHO द्वारा वैक्सीन निर्माण के मानक तय हैं. उन चरणों को पूरा करने के बाद ही किसी को मान्यता मिलेगी. यानि रूस की वैक्सीन अभी दो चरण और पूरा करेगी.

इससे पहले COVID-19 वैक्सीन को लेकर देश में तब चर्चा तेज हुई थी, जब ICMR के साथ स्वदेशी मेडिकल कम्पनी भारत बायोटेक ने कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा करने के साथ इसे 15 अगस्त तक लांच करने की बात कही थी. इस वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल एम्स समेत देश में कई मेडिकल संस्थानों में 7 जुलाई से शुरू हो गया है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: जो ये दावा मीडिया रिपोर्ट में किया जा रहा है कि रूस ने COVID-19 की वैक्सीन बना ली है, पूरी तरह सही नहीं है. अभी इस वैक्सीन के कई और विस्तृत परीक्षण बाकी हैं.

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