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#FactCheck जानिए, पूर्व रक्षा मंत्री मेनन की इस फोटो की असलियत क्या है

भारत और चीन की तनातनी के बीच सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है. इसमें पूर्व रक्षा मंत्री वीके मेनन को 1962 में हुई भारत की हार का दोषी बताया जा रहा है. साथ ही उनके कैरेक्टर पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. The News Postmortem की टीम ने इसकी पड़ताल की.

भारत और चीन के बीच तनातनी चल रही है. 15 जून को गलवान घाटी में दोनों देशों के जवानों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में भारत के 20 जवान भी शहीद हो गए थे. इसके बाद 3 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लेह दौरा कर जवानों का हौसला बढ़ाया था. लेह के आर्मी हॉस्पिटल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने पर कांग्रेस समेत अन्य कुछ दलों ने सवाल भी उठाए थे, जो बाद में गलत साबित हुए थे. इस बीच सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट वायरल हुई, जिसमें ट्विटर यूजर ने 1962 में हुए युद्ध में भारत की हार के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा है.

यशपाल भारती ने अपने ट्विटर अकाउंट @1981yash पर 7 जुलाई को एक पोस्ट की. इसमें दो युवतियों के साथ भारत के पूर्व रक्षामंत्री मेनन की फोटो है. इसमें फोटो के उपर लिखा है, 1962 की लड़ाई लड़ते कांग्रेसी रक्षा मंत्री मेनन. जबकि कैप्शन में लिखा है, भारत के ऐय्याश और नकारा रक्षा मंत्री ने ब्रिटिश और चीनी लड़कियों से ऐय्याशी के चक्कर में 1962 में भारत का मानसरोवर सहित 72,000 वर्गमल क्षेत्र चीन को भेंट कर दिया और हजारों भारतीय सैनिकों को मरवा डाला.. ये रंगीले चाचा के नक्शेकदम पर चलते थे.

यह पोस्ट देखकर The News Postmortem की टीम ने इसका पोस्टमार्टम करने की ठानी, लेकिन उससे पहले आपको बता दें कि आखिर यह मेनन हैं कौन. उनका पूरा नाम Vengalil Krishnan Krishna Menon था. वह 1957 से 1962 तक भारत के रक्षा मंत्री रहे थे. भारत और प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर उनका खासा प्रभाव था. लंदन में रहते हुए उन्होंने भारत की आजादी की मांग की थी. इस दौरान उनकी मुलाकात नेहरू से हुई थी. नेहरू ने आजादी के बाद वीके मेनन को इंग्लैंड का पहला हाईकमिश्नर नियुक्त किया था. कश्मीर मुद्दे पर वह बिना थके घंटों बोलते थे. संयुक्त राष्ट्र में उन्होंने भारत का पक्ष रखते हुए 8 घंटे का भाषण दिया था. रूस को भारत के करीब लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही थी. satyagrah.scroll.in के अनुसार, वह हाई कमिश्नर के तौर पर केवल एक रुपये सैलरी लेते थे. जवाहर लाल नेहरू ने 1957 में उनको देश वापस बुला लिया. चुनाव के बाद उनको रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

Jawahar Lal Nehru and VK Krishnan Menon Pic (Source: The Print)
Source: The Print

अब हम बात करते हैं वायरल पोस्ट की.इमेज को ध्यान से देखने पर उस पर हिस्टोरिक इमेज का वाटर मार्क दिखता है. Google पर हिस्टोरिक इमेज सर्च करने पर हमें outlet.historicimages.com वेबसाइट मिली. इसमें कई पुरानी विंटेज फोटोग्राफ्स मिली. इसमें मेनन सर्च करने पर हमें यह फोटो मिल गई. यह फोटो 1955 की है. इसका कैप्शन भी दिया गया था. इसमें लिखा है, यूनाईटेड स्टेट्स में भारत के रोविंग एंबेसडर ​वीके मेनन एक डिप्लोमेटिक मिशन पर, पिछली रात हुई एक निजी स्विमिंग पार्टी में दो छात्राओं से बात करते हुए. मेनन ने अपना हाथ जापान की मिशिको नागाशामी के सिर पर रखा हुआ है, जबकि वह बार्सिलोना, स्पेन की पिलारिन मार्तिनेज से बात कर रहे हैं. दोनों लड़कियां उस ग्रुप का हिस्सा है, जो एक साल की एजुकेशल ट्रेनिंग पूरी करके यूएस में घूमने आया है.

Original Image of Former Defence Minister V K Krishnan Menon
Source: Historic Images

वायरल पोस्ट में दावा किया गया है ये दोनों लड़कियां ब्रिटिश और चीनी लड़किया हैं जबकि कैप्शन में दिया गया है कि ये दोनों जापान और स्पेन की हैं. मतलब यह बात तो गलत साबित हो गई.

अब हमने इसकी और पड़ताल की. फोटो को Google पर रिवर्स इमेज में डालने पर हमें the lallantop की स्टोरी मिली. इसमें बताया गया कि यह तस्वीर 1955 की है. उस समय वीके मेनन रक्षा मंत्री नहीं थे. उस समय वह अमेरिका में भारत के राजदूत थे. जैसा ही कि हम पहले ही बता चुके हैं कि उनको 1957 में रक्षा मंत्री बनाया गया था. अक्टूबर 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया था. इसमें भारत की हार हुई थी लेकिन इसके लिए अकेले मेनन को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा.

Postmortem रिपोर्ट: पोस्ट में दावा किया गया कि दोनों लड़कियां ब्रिटेन और चीन की है, तो यह गलत साबित हुआ. इसके अलावा फोटो 1955 की है. उस समय मेनन अमेरिका में भारत के राजदूत थे, जबकि युद्ध 1962 में हुआ.

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