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Fact Check: चमोली में ITBP के जवान पहुंचा रहे प्रभावितों को राशन, RSS कार्यकर्ताओं की यह फोटो 2013 की है

उत्तराखंड के चमोली में आई प्रलय को अब एक हफ्ता होने वाला है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक फोटो तेजी से वायरल हो रही है. इसमें दावा किया जा रहा है कि प्रभावित गांवों में आरएसएस के कार्यकर्ता राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं.

उत्तराखंड के चमोली में आई प्रलय को अब एक हफ्ता होने वाला है. इतने दिन बाद भी 166 लोगों की तलाश की जा रही है. वहीं अब तक 38 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं. आपदा से प्रभावित गांवों में राशन समेत अन्य जरूरी सामन पहुंचाया जा रहा है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक फोटो तेजी से वायरल हो रही है. इसमें दावा किया जा रहा है कि प्रभावित गांवों में आरएसएस के कार्यकर्ता राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं.

The News Postmortem को भी यह फोटो भेजकर इसकी पड़ताल करने को कहा गया. फोटो में आरएसएस के कुछ कार्यकर्ता पहाड़ी रास्तों से राहत सामग्री ले जाते दिख रहे हैं. साथ में लिखा है,
वामपंथियो देखो, उत्तराखंड जल प्रलय, बाकी तो एक दिन के बाद भूल गए पर संघ उसी दिन से भिड़ा है. चमोली..लगभग 13 गांव के तो अवशेष ही बचे हैं, सैकड़ों स्त्री-पुरुष-बच्चे खुले में हैं. दिन जैसे-तैसे कट जाता है, लेकिन रात में तापमान 1-2 डिग्री हो जाता है… उस पर जंगली भालुओं का डर!!
पुल बह चुके है, सड़क भी नही, खड़ीं पहाड़ियों औेर धंसती चोटियां, ऐसे में खाने-पीने की सामग्री से भरी बोरियां कंधे पर उठाए ये वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं, जिन्होंने पिछले 3 दिनों से जल प्रलय स्थल पर मोर्चा संभाल रखा है… कोई भूखा न रहे, कोई बीमार न हो, कोई ठंड से न मरे. हर तरह की चिंता में लगा है देवभूमि में संघ. सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं देश की हर संकट विपत्ति की घड़ी में संघ चट्टान की तरह खड़े रहता है जबकि वामपंथी जहरीले नाग सिवाय जहर फैलाने के कुछ नहीं करते.
ये वही संघ है, जिसे जिहादी, वामपंथी, मिसनरी और देश का विपक्ष खत्म करने के षड्यंत्र रचते आया है. पर हिन्दू समाज जानता है हर परिस्थिति में संघ उसके सुख दुख का साथी है. यही कारण है कि संघ विरोधियों के 70 वर्षों के षड्यंत्र के बावजूद, संघ निरन्तर बढ़ता जा रहा है.
संघ और समाज एक होता जा रहा है.

rss in chamoli uttarakhand news

प्रकाश सिह बब्बर ने भी 11 फरवरी को इस फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा,
चमोली तपोवन लगभग 13 गांवो के तो अवशेष ही बचे हैं,
सैकड़ांे स्त्री-पुरुष-बच्चे खुले मे पड़े हंै, दिन जैसे-तैसे कट जाता है लेकिन रात मे तापमान 1-2 डिग्री हो जाता है, उस पर जंगली भालुओ का डर.
ऐसे मे खाद्य समाग्री से भरी बोरियां उठाए यह कौन लोग हैं?
नमन वंदन, ऐसी निष्ठा को
संघ शक्ति कलयुगे

chamoli uttarkhand rss help

फेसबुक पर भी इसी मैसेज के साथ जगमोहन आनंद, देवेश सरदाना, सतीश चंद्रा ने भी फोटो को शेयर किया.

chamoli uttarakhand news
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हमने रिवर्स इमेज के सहारे इसे गूगल पर तलाश किया तो संवाद ब्लाॅग पर यह फोटो मिल गई. यह आर्टिकल करीब 8 साल पहले पब्लिश हुआ था. खबर के अनुसार, 16 जून को उत्तराखंड में बाढ़ आई थी. इसमें कर्द सड़कें बहने के कारण गांवों का संपर्क टूट गया था. साथ ही कई गांव प्रभावित हुए थे. इसके बाद आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने वहां प्रभावित गांवों में पैदल रास्त तय करके राशन पहुंचाया था.
विकीपीडिया के मुताबिक, 16 जून 2013 को उत्तराखंड में बादल फटने से जलप्रलय आई थी. 2004 की सुनामी के बाद यह सबसे बड़ी आपदा थी. इसमें 5700 से ज्यादा लोगों को मृत मान लिया गया था. इसमें 934 स्थानीय निवासी थे. इसमें करीब 3 लाख यात्री राज्य में फंस गए थे. भारतीस वायुसेना और सेना ने प्रभावित इलाकों से करीब 1 लाख 10 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था. मतलब यह फोटो 2021 की नहीं है.

Chamoli uttarakhand hindi news

इस बार चमोली में आई आपदा में आईटीबीपी के जवान प्रभावित गांवों में राशन और दवाइयां पहुंचा रहे हैं. 12 फरवरी को आर्ठटीबीपी के ट्विटर हैंडल से इसकी चार फोटो भी ट्वीट की गई. इसके अनुसार, सुकी, लाता और भलगाउं गांवों में हेलीकाॅप्टर से राषन और जरूरी सामान पहुंचाया गया, जिसे आईटीबीपी के जवानों ने आगे प्रभावितों तक पहुंचाया.

Postmortem रिपोर्टः ग्लेशियर टूटने से आई आपदा के कारण कुछ गांवों का संपर्क देश से कट गया है. वहां आईटीबीपी के जवान मदद पहुंचा रहे हैं. आरएसएस के कार्यकर्ताओं की यह फोटो जून 2013 को आई प्रल के समय की है.

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