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Fact Check: क्या किसान आंदोलन के नाम पर पंजाब में शुरू हो गया हिंदी भाषा कर विरोध, जानिए क्या है सच

सोशल मीडिया पर 27 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें कुछ सिखों को नाॅर्थ जोन कल्चरल सेंटर के बोर्ड पर हिंदी भाषा पर कालिख पोतते हुए दिखाया गया है. साथ ही दावा किया गया है कि किसान आंदोलन के नाम पर पहले पंजाब में टाॅवर तोड़े गए और अब हिंदी भाषा का विरोध हो रहा है.

क्या किसान आंदोलन के नाम पर सिखों ने हिंदी का भी विरोध शुरू कर दिया है? सोशल मीडिया पर 27 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें कुछ सिखों को नाॅर्थ जोन कल्चरल सेंटर के बोर्ड पर हिंदी भाषा पर कालिख पोतते हुए दिखाया गया है. साथ ही दावा किया गया है कि किसान आंदोलन के नाम पर पहले पंजाब में टाॅवर तोड़े गए और अब हिंदी भाषा का विरोध हो रहा है. दावा यह भी किया जा रहा है कि किसान आंदोलन के बाने हिंदुओं का विरोध किया जा रहा है. The News Postmortem के पाठक ने भी ऐसा ही एक वीडियो भेजकर उसकी पड़ताल करने को कहा.

Sikhs Painted The North Zone Cultural Board

सुधीर श्रीवास्तव उर्फ सोनू ने 8 जनवरी कोयह वीडियो ट्वीट किया है. साथ में लिखा है,
यह है इनका असली चेहरा… किसान आन्दोलन बहाना है हिन्दू और हिन्दू विरोध असली मकसद है.
इस ट्वीट को 1700 से लोग रिट्वीट कर चुके हैं.

श्रीष त्रिपाटी ने भी 8 जनवरी को इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है,
टॉवर तोड़ने के बाद अब पंजाब में हिंदी नही चलेगी.
किसान आंदोलन बहाना है, हिन्दू और हिन्दू विरोध असली मकसद है,
यह ही है किसान आंदोलन की हकीकत.
ये खालिस्तानी आंदोलन हैए किसानों के भेष में आतंकीए उनके समर्थक हैं.
उनका एजेंडा अराजकता फैलाना और देश को तोड़ना है.
ये लोग पंजाबियों के दुश्मन हैंण् इन्हें पूरे भारत मे रह रहे पंजाबियों के बारे में चिंता होती तो ऐसा कभी नहीं करते, दोगले वामपंथियों का असर है.
यही खालिस्तानियों ने किया था कभी.

फेसबुक पर भी तथाकथित सेकुलर और एमके शर्मा समेत कई यूजर्स ने इस पोस्ट को शेयर किया है.

Sikhs Painted North Zone Cultural Center Board Reality

वीडियो में दिख रहे बोर्ड पर नाॅर्थ जोन कल्चरल सेंटर हिंदी, अंग्रेजी और पंजबी में लिखा है. यह पटियाला में है. हमने रिवर्स इमेज से गूगल पर वीडियो की पड़ताल की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली. फिर हमले कीवड्र्स से इसकी छानबीन की तो यूट्यूब पर punjabi first sign board kala pocha mota singh naiwala lakha sidhana punjabi maa boli टाइटल से यह वीडियो मिली गई. mota singh naiwala चैनल पर इसे 22 फरवरी 2019 को अपलोड किया गया है.

खोजबीन करने पर हमें इंडिया टुडे की खबर का लिंक मिला. इसके अनुसार, नाॅर्थ जोन कल्चरल सेंटर के डायरेक्टर प्रो. सौभाग्य वर्धन ने बताया कि यह वाकया चंडीगढ़-बठिंडा क्षेत्र में हिंदी के खिलाफ चलाए गए अभियान का हिस्सा था. दो साल पहले प्रदर्शनकारियों ने बोर्ड पर हिंदी में लिखे उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पर काला रंग पोत दिया था. मतलब इस वीडियो का किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है.

अब बात करते हैं कोलाज की, जिसमें कुछ लोग हाईवे वर साइबोर्ड पर हिंदी भाषा पर काला रंग पोत रहे हैं. गूगल पर कीवर्ड से सर्च करने पर हमें 22 अक्टूबर 2017 को ट्रिब्यून इंडिय में छपी खबर का लिंक मिला. इसके मुताबिक, कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ‘सेव पंजाबी’ अभियान के तहत रोड पर लगे साइ बोर्ड पर काला रंग पोता. बठिंडा में लोगों ने ोड पर लगे साइनबोर्ड पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा पर काला रंग कर दिया. उनका कहना था कि पंजाबी उनकी मातृ भाष है, इसके बावजूद उसे साइनबोर्ड में तीसरे स्थान पर रखा गया है.

Highway Signboard Painted By Punjabi
Highway Signboard Painted By Punjabi

25 अक्टूबर 2017 को हिंदुस्तान टाइम्स ने भी इस बारे में खबर छापी ह. इसके मुताबिक, पंजाबी भाषा को लेकर चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने फौरन कार्रवाई की है. पब्लिक वक्र्स डिपार्टमेंट ने बठिंडा-फरीदकोट नेशनल हाईवे पर लगे साईनबोर्ड से हिंदी और अंग्रेजी भाषा का पंजाबी के बाद लिखने का कार्य शुरू कर दिया है. मतलब फोटो का यह कोलाज भी किसन आंदोलन का नहीं है.

Highway Signboard Painted By Punjabi

Postmortem रिपोर्टः 27 सेकंड का वायरल वीडियो उस समय का है, जब पंजाब में हिंदी और अंग्रेजी भाषा का विरोध चल रहा था मतलब 2017-2018 का. साथ ही फोटो का कोलाज भी अक्टूबर 2018 का है. मतलब इनका किसाना आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है. ये पोस्ट पूरी तरह से फेक हैं.

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