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Fact Check: क्या शहीद गुरतेज सिंह के पिता किसान आंदोलन में सिंघु बाॅर्डर पर डटे हुए हैं, जानिए क्या है सच

शहीद गुरतेज सिंह ने पिछले साल जून में गलवान घाटी में हुए संघर्ष में 12 चीनी सैनिकों का मार गिराया था. दावा किया जा रहा है कि उनके पिता किसान आंदोलन के समर्थन में 70 दिन से सिंघु बाॅर्डर पर हैं.

किसान आंदोलन एक बार फिर रंग में आ गया है. रिहाना, ग्रेटा और मिया खलीफा के ट्वीट के बाद तो काफी खलबली मच गई है. मीडिया इसके पीछे विदेशी साजिश होने का दावा कर रही हैं. क्रिकेटर, फिल्म स्टार समेत कई हस्तियां भी इसको साजिश करार दे रहे हैं, जबकि किसान आंदोलन के समर्थक इसको लेकर गद्गद् हुए पड़े हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि गलवान घाटी में शहीद हुए जवान गुरतेज सिंह के पिता विरसा सिंह ढाई एकड़ जमीन के मालिक हैं और वह 70 दिन से किसान आंदोलन में सिंघु बाॅर्डर पर डटे हुए हैं.

Shaheed Gurtej Singh Father in Kisan Andolan
Shaheed Gurtej Singh Family

The News Postmortem को व्हाट्सऐप पर ऐसी ही एक पोस्ट मिली. इसमें लिखा है,
शहीद गुरतेज सिंह ने मौत से पहले संघर्ष में 12 चीनी सैनिकों को धराशायी कर दिया था.
ढाई एकड़ जमीन पर होने वाली अपनी उपज की सही कीमत के लिए उनके वृद्ध पिता पिछले 70 दिन से धरने पर हैं और बीजेपी आईटी सेल के लोग और एसी कमरे में बैठे लोगों को बाॅर्डर पर बैठे किसान आतंकी और गद्दार नजर आ रहे हैं. यह सब लिखते हुए मेरे मन में आक्र्रोश और आंखों में आंसू हैं. मानता हूं मोदी जी ने देश की बेहतरी के लिए अच्छे काम किए हैं मगर किसानों के साथ आज जिस तरह की घेरेबंदी हो रही है, देश की चल-अचल संपत्ति को जिस तरह बेचा जा रहा है, वह चिंताजनक है.
इसके साथ ही कुछ फोटो के कोलाज भी वायरल हो रहे हैं.

gurtej singh galwan martyr family
gurtej singh galwan martyr

ट्विटर पर भी हमें ऐसी ही पोस्ट मिली. तनवीर अहमद के अकाउंट से 3 फरवरी को कुछ ऐसा मैसेज ट्वीट किया गया. इसमें लिखा है,
ये गलवान मंे शहीद हुए पंजाब प्लाटून के जवान गुरतेज सिंह हैं. अदम्य साहस से शत्रु का मुकाबला करने के लिये इन्हें गणतंत्र दिवस पर मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया. इनके पिता सरदार विरसा सिंह, जो ढाई एकड़ जमीन के किसान हैं. वे पिछले 70 दिन से सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन में डटे हुए हैं.

इसके अलावा अभिषेक अंशु, अनवर पीएम, पारस बुधवर और हाकिम शहजाद अहमद ने भी फेसबुक पर इस तरह की पोस्ट शेयर की है.

gurtej singh galwan martyr
gurtej singh galwan martyr
gurtej singh galwan martyr

सबसे पहले हम आपको शहीद गुरतेज सिंह के बारे में बताते हैं. गुरतेज सिंह पंजाब के मनसा जिले के बीरवाला डोगरा गांव के रहने वाले थे. उनकी उम्र मात्र 23 साल थी, जब उन्हें शहादत मिली. 16 जून को गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों में हिंसक संषर्घ हुआ था. इसमें गुरतेज सिंह ने शहीद होने से पहले 12 चीनी सैनिकों को अपनी कृपाण से ही मार दिया था. वह कुछ साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे. वह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे.

हमने गूगल पर सबसे पहले कोलाज में मौजूद फोटो की तलाश शुरू की तो एक फोटो में बुजुर्ग शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे हैं. यह फोटो हमें डेक्कन हेराल्ड में मिल गई. 18 जून 2020 को छपी फोटो में कैप्शन लिखा है कि शहीद सतानम सिंह के पिता जगबीर सिंह अपने बेटे को श्रद्धांजलि देते हुए. गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के हुए संघर्ष में वह शहीद हुए थे. गुरदासपुर के निकट भेजपुर गांव में उनको अंतिम विदाई दी गई. हालांकि, कोलाज में मौजद बाकी फोटो हमें ट्ब्यिून इंडिया और दैनिक जागरण में मिल गईं. इससे यह साबित हो गया कि एक फोटो शहीद गुरतेज सिंह के पिता की नहीं है.

gurtej singh galwan martyr images
Source: Deccan Herald
gurtej singh galwan martyr family image
Source: The Tribune

इसके बाद हमने गूगल पर बाकी उनके पिता के आंदोलन में बैठे होने की पड़ताल की तो इंडियन एक्स्रपेस की खबर का लिंक मिला. 6 जनवरी को छपी खबर के अनुसार, गुरतेज सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया है. घर पर गुरतेज सिंह के भाई तरलोक सिंह के भाई को जब यह जानकारी मिली तो वह रो दिए थे. उस समय शहीद के पिता विरसा सिंह और मां प्रकाया कौर सो चुके थे. विरसा सिंह के पास ढाई एकड़ जमीन है और वह किसान हैं. उनका परिवार किसान आंदोलन का भी हिस्सा रह चुका है. विरसा सिंह दिसंबर में एक हफ्ते दिल्ली बाॅर्डर पर रहे थे.

Postmortem रिपोर्टः शहीद गुरतेज सिंह के पिता के पास ढाई एकड़ जमीन है और वह किसान आंदोलन का हिस्सा रह चुके हैं. हालांकि, व दिसबंर में एक हफ्ते दिल्ली बाॅर्डर पर रहे थे इसलिए यह दावा गलत है कि विरसा सिंह पिछले 70 दिन से सिंघु बाॅर्डर पर डटे हुए हैं.

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