Home COVID-19 Truth #FactCheck Covid—19 की वैक्सीन से साइड इफेक्ट का कितना खतरा होगा

#FactCheck Covid—19 की वैक्सीन से साइड इफेक्ट का कितना खतरा होगा

अगले साल 2021 में लोगों तक कोविड—19 की वैक्सीन पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इस बीच कोरोना की वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट्स को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.

कोविड—19 के अब 24 घंटे में 90 हजार से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं. दुनिया में मरीजों का आंकड़ा 2 करोड़ 72 लाख से ज्यादा पहुंच चुका है जबकि करीब 8 लाख 91 हजार की मौत हो चुकी है. भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या करीब 42 लाख हो चुकी हैं. इनमें से 71 हजार की ज्यादा की कोरोना से मौत हो चुकी है. कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लोग भी अब इसकी वैक्सीन का इंतजार बेताबी से कर रहे हैं. डब्ल्यूएचओ का मानना है कि अगले साल 2021 में लोगों को यह वैक्सीन मिल पाएगी. हालांकि, रूस वैक्सीन बनाने का दावा कर रहा है कि लेकिन अन्य देश उस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. इस बीच वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर भी भ्रांती फैल रही है.

कोविड—19 की कुछ ऐसी ही भ्रांतियों को आकाशवाणी समाचार @AIRNewsHindi ने सुलझाया है. कोविड—19 के विशेषज्ञ डॉक्टरों से बात करके आकाशवाणी समाचार ने कई सवालों के जवाब दिए हैं.

वैक्सीन के परीक्षण के बाद कोई साइड इफेक्ट हुआ तो क्या होगा?

ICMR के डॉ. रमन आर गंगाखेडकर का कहना है कि तीनों ट्रायल में सफल होने के बाद ही वैक्सीन दी जाएगी. थर्ड स्टेज में कड़े लेवल पर इसका लोगों पर ट्रायल किया जाता है. इसके बाद चौथा ट्रायल भी होता है. इसमें जिनको वैक्सीन दी जाती है, उन पर हर समय निगरानी रखी जाती है. वैक्सीन धीरे—धीरे लोगों तक पहंंचती है, इस बीच सभी लोगों पर छोटे—बड़े स्तर पर निगरानी रखी जाती है. वैक्सीन की एक समयसीमा होगी. कुछ साल बाद अगर कोई साइड एफेक्ट होता है तो उस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है.

covid 19 facts in hindi

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कभी-कभी थकान के साथ-साथ सांसें तेज हो जाती हैं, तो क्या कोरोना के लक्षण हैं?

IMA के पूर्व सचिव डॉ. नरेंद्र सैनी का कहना है कि अगर यह परेशानी काफी पुरानी है तो इसे कोरोना नहीं मान सकते हैं. हां, अगर ऐसी शिकायत अचानक होती है तो जांच कराएं. कोरोना में बुखार, खांसी, छींक के साथ—साथ थकान, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत होती है. वायरस बढ़ने पर हालत गंभीर होने लगती है. अगर वायरस नहीं बढ़ पा रहा है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इसे रोक रही है. ऐसे लोग खुद—ब—खुद ठीक हो जाते हैं.

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क्या बंद कमरे में दांतों का इलाज करवाने से मना किया गया है ?

आईएमए के पूर्व सचिव डॉ. नरेंद्र सैनी ने कहा कि देश में अधिकतर लोगों को नहीं पता है कि उनको वायरस जकड़ चुका है. दांत में कोई परेशानी होने पर वे डॉक्टर के यहां जाएंगे. ऐसे में उनके मुंह से एयरोसोल के बाहर आने की संभावना रहती है. अगर कमरा बंद है और वेंटिलेशन नहीं है तो वायरस वहीं पर बना रहेगा. इससे डॉक्टर के साथ ही वहां आने वाले लोग भी संक्रमित हो सकते हैं.

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क्या कोविड-19 से ठीक हुए बुजुर्ग प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं?

Public Health Foundation of India (PHFI) के अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि अक्सर बुजुर्गों से प्लाज्मा नहीं लिया जाता है. इसके लिए हमेशा स्वस्थ व्यक्ति को चुना जाता है. उसमें भी यह देखा जाता है कि उसमें प्लाज्मा की कितनी मात्रा है.

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क्या मुंह से सांस लेने पर वायरस के संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है?

PHFI के अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी का कहना है कि अक्सर जुकाम होने पर नाक बंद हो जाती है. इसके बाद लोग मुंह से सांस लेने लगते हैं. इस तरह से सांस लेने पर भी वायरस से संक्रमित होने का खतरा उतना ही है. इससे बचने के लिए मास्क इस तरह से लगाए जिससे नाक और मुंह दोनों कवर रहें.

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बारिश में मास्क गीला हो जाए तो क्या उसे लगाए जाना सुरक्षित है?

आईसीएमआर के डॉ. रमन आर गंगाखेडकर के अनुसार, बारिश में भीगने पर मास्क फौरन उतार दें. ऐसे समय में एक मास्क हमेशा अपने साथ में रखें. गीला होने पर मास्क उतार लें और दूसरा सूखा मास्क लगा लें. मास्क को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले साबुन और पानी से ठीक से धो लें.

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क्या किसी के अंतिम संस्कार में जा सकते हैं?

आईसीएमआर के डॉ. रमन आर गंगाखेडकर ने कहा कि कोविड से मौत होने पर शव को प्लास्टिक में लपेटकर दिया जाता है. अगर शव प्लाटिक में ठीक से पैक करके दिया गया है तो उसको कंधा देने में कोई खतरा नहीं है. अगर शव ठीक से पैक नहीं है और कोई शख्स बिना एहतियात के शव यात्रा में पहुंचता है तो उसके संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है.

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Postmortem रिपोर्ट: कोविड—19 के साथ ही कई अफवाहें भी उड़ने लगी थीं. इनसे हमेशा बचने की सलाह दी जाती है. The News Postmortem इस तरह की सभी अफवाहों से आपको अवगत कराता रहेगा.

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