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#FactCheck मदरसे के छात्रों के साथ अथर्ववेद की तस्वीर का क्या है सच

सोशल मीडिया पर मदरसा छात्रों की एक तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है कि वे हिन्दू धर्म ग्रन्थों में छेड़छाड़ कर बदल रहे हैं. हमारी पड़ताल में ये तस्वीर फेक निकली.तस्वीर हैदराबाद के मदरसे की है और छात्र वहां लाइब्रेरी में पढ़ रहे हैं.

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की जा रही है. जिसमें कुछ मुस्लिम छात्र किसी लाइब्रेरी में बैठे हैं और वहीँ उनके बीच अथर्ववेद भी रखा है. इस तस्वीर को कुछ लोगे फेसबुक और ट्विटर पर ये कहकर साझा कर रहे हैं कि हमारे धर्म ग्रंथों को साजिश के तहत फिर से लिखा जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी हमारे धर्म को जान ही न सके.

देखो और ध्यान दो और क्या हो रहा है हमारे देश में 🤔🤨🤨🤨🤨🤨हमारे धर्म ग्रंथों में मिलावट करने का कार्य जोरों से चल रहा…

Posted by Deadpool Lite Ind on Sunday, July 19, 2020

हमारे यूजर ने ये तस्वीर हमें भेजी और इसका सच पता लगाने को कहा. जिस पर टीम The News Postmortem ने इसकी पड़ताल शुरू की. हमने ट्विटर पर इस तस्वीर को खंगाला तो आलोक कुमार मिश्रा नामक एक यूजर ने ये तस्वीर 22 जुलाई को पोस्ट की थी. इसमें कुछ मुस्लिम छात्र बैठे हैं और वहां अथर्ववेद भी रखा है. जिसमें ये दावा किया गया कि आने वाली पीढ़ी चरित्र निर्माण नहीं पढ़ सकेगी.

ये है मैसेज

देखो और ध्यान दो और क्या हो रहा है हमारे देश में

हमारे धर्म ग्रंथों में मिलावट करने का कार्य जोरों से चल रहा है,,,, आने वाली 20 साल बाद हमारी अगली पीढ़ियां ये #मिलावटी वेद ,पुराण , उपनिषद पढ़ेंगे। ,,, जिसमें लिखा होगा चरित्र निर्माण बेकार की बात है..

हमने इस तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया तो हमें 2 अप्रैल 2014 का The Hindu का हैदराबाद का एक आर्टिकल मिला. जिसे जे. एस. इफ्तिखार ने लिखा था. आर्टिकल के मुताबिक ये तस्वीर हैदराबाद के अल महादुल आलि अल इस्लामी मदरसा की है. फोटो जी रामकृष्णन ने खींची है. इस फोटो कैप्शन में ही लिखा था कि मदरसे के छात्र अन्य धर्मों को भी समझने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं. यानि ये तय हो गया कि जिस दावे के साथ ये तस्वीर साझा की जा रही है वो पूरी तरह गलत है.

Source: The Hindu

यही नहीं जब ये तस्वीर गलत दावों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर हुई तो मदरसे के उप निदेशक उस्मान अबेदीन ने भी इन खबरों का खंडन किया. उनके मुताबिक ये तस्वीर मदरसे की लाइब्रेरी की है और यहां छात्र इस्लाम के साथ-साथ सभी धर्मों की पढ़ाई करते हैं. ऐसा बीते कई सालों से होता आ रहा है. मदरसे में एक हजार से अधिक किताबें अन्य धर्मों की भी हैं.

Postmortem रिपोर्ट: हमारी पड़ताल में ये पोस्ट पूरी तरह फेक साबित हुई. ये तस्वीर 2014 की है और मदरसे में पढ़ रहे छात्रों की है. इसलिए जो दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है वो गलत है.

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