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Fact Check: सात साल पुरानी तस्वीर को किसान आन्दोलन से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश

सिख हाथों में खालिस्तान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है. इस पर ये दावा किया जा रहा है कि इनका मकसद किसान आन्दोलन नहीं बल्कि खालिस्तान आन्दोलन है.

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि बिल को लेकर किसान आन्दोलन कर रहे हैं. दो दौर की वार्ता के बाद भी किसान सरकार की बातों से संतुष्ट नहीं है. वहीँ इस बीच लगातार किसान आन्दोलन के खिलाफ दुष्प्रचार भी सोशल मीडिया पर किया जा रहा है. जी हां एक ऐसी ही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक सिख हाथों में खालिस्तान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है. इस पर ये दावा किया जा रहा है कि इनका मकसद किसान आन्दोलन नहीं बल्कि खालिस्तान आन्दोलन है. इस फोटो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर खूब शेयर किया जा रहा है.

The News Postmortem ने इस तस्वीर की सच्चाई जानने के लिए पड़ताल शुरू की. फेसबुक पर ये तस्वीर हमें बलान पांडा नामक यूजर के वाल पर मिली. उसने तस्वीर के साथ लाइनें भी लिखीं थीं कि

इनका आंदोलन किसान आंदोलन नही है! इनका मकसद खालिस्तान बनाना!!*

*इसके पीछे कहीं न कहीं काँग्रेस और आपिया -गिरगिट है!*

##बेचारों को किसान लिखना भी नहीं आता##

इसके बाद यही तस्वीर हमें ट्विटर पर भी मिली.संदीप कुमार जरार नामक यूजर ने भी एक दिसम्बर को इन्हीं लाइनों के साथ ये तस्वीर पोस्ट की.इसमें नीले कपड़ों में एक सिख हाथों में खालिस्तान की मांग का पैम्फलेट लेकर खड़ा है.

जब हमने इस फोटो को लेकर सर्च शुरू किया तो हमें हालिया किसान आन्दोलन में कहीं भी ये तस्वीर नहीं नजर आई. जब तस्वीर को ज़ूम करके देखा तो पीछे गुरुद्वारा दिख रहा है. यानि तस्वीर दिल्ली- हरियाणा बॉर्डर की नहीं है. और सर्च करने पर 10 जून 2020 का ट्रिब्यून का एक आर्टिकल मिला, जिसमें ये तस्वीर छपी है. यानि ये तय हो चुका कि अब ये तस्वीर पुरानी है किसान आन्दोलन की नहीं.

वहीँ जब और डिटेल में सर्च किया तो पता चला कि ये तस्वीर 2013 की है. यानि सात साल पहले कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के 29 साल होने पर अमृतसर स्थित अकालतख्त में खालिस्तान समर्थक इकट्ठा हुए थे. तब ये तस्वीर चर्चा में आई थी.

Postmortem रिपोर्ट:- हमारी पड़ताल में साबित हो गया कि सोशल मीडिया पर किसान आन्दोलन को जो खालिस्तान से जोड़ने की तस्वीर वायरल हो रही है, वो पूरी तरह फर्जी है.वायरल तस्वीर सात साल पुरानी है और उसका किसान आन्दोलन से कोई सम्बन्ध नहीं है.

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