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Fact Check: BJP ने DGP रह चुके गुप्तेश्वर पांडेय की जगह पूर्व हवलदार को दिया टिकट

बक्सर सीट से पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट मिलने की उम्मीद थी. इसी सीट के सपने लेकर डीजीपी ने पुलिस महकमे की नौकरी छोड़ी थी.

बिहार चुनाव 2020 के पहले चरण के लिए नामांकन का दौर समाप्त हा चुका है. राज्य के 16 जिलों की 71 सीटों पर पहले चरण में मतदान होगा. इसके लिए 28 अकटूबर को वोट पड़ेंगे. भाजपा, जदयू और राजद के उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं. इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा बक्सर सीट को लेकर हो रही है. वहां से पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट मिलने की उम्मीद थी. इसी सीट के सपने लेकर डीजीपी ने पुलिस महकमे की नौकरी छोड़ी थी.

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें कहा गया है कि राज्य में पुलिस के सबसे बड़े अधिकारी को एक पूर्व हवलदार ने चित कर दिया है. मतलब बक्सर से पूर्व डीजीपी गुप्तेश्व पांडेय की जगह हवलदार रह चुके पूर्व पुलिसकर्मी पर भरोसा जताया गया है. Utkarsh Singh @UtkarshSingh_ ने 8 अक्टूबर को ट्वीट किया,
बक्सर सीट से BJP ने जिस परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दिया है वो पहले हवलदार हुआ करते थे.
यानी पूर्व हवलदार अपने पूर्व DGP पर भारी पड़ गया.

इस ट्वीट को मशहूर शायर और कांग्रेस के नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी रिट्वीट किया है. उन्होंने लिखा,
अरे भई कुछ तो गुप्त रहने दो

Imran Pratapgarhi Tweet

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने भी काफी सुर्खियां बटोरी हैं. वह बिहार सरकार की प्रवक्ता की तरह खुलकर बोले हैं. महाराष्ट्र सरकार का डटकर सामना किया. इतना ही सीट की खातिर पुलिस की नौकरी से विदाई ले ली. अब उनको टिकट नहीं मिला और एक पूर्व हवलदार को टिकट दे दिया गया. इस पर The News Postmortem को भरोसा नहीं हुआ तो हमने इसकी पड़ताल शुरू की.

Sushant and Gupteshwar pandey

गूगल पर सर्च करने पर हमें कई खबरों के लिंक मिले. Aaj Tak के मुताबिक, वीआरएस लेने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने जेडीयू का दामन थाम लिया था. वह बक्सर सीट से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे. यह भाजपा की परंपरागत सीट रही है. हालांकि, 2015 में यह आरजेडी के खाते में चली गई थी. बंटवारे में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई और गुप्तेश्वर पांडेय के अरमानों पर पानी फिर गया. भाजपा ने यहां से परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दिया है. वह हवलदार रह चुके हैं.

Dainik Jagran के अनुसार, भाजपा ने 7 अक्टूबर की शाम को बक्सर सीट के उम्मीदवार का ऐलान किया था. इस ऐलान के साथ ही गुप्तेश्वर पांडेय के अरमानों पर पानी फिर गया. यहां से परशुराम चतुर्वेदी को मौका मिला है. इस सीट से परशुराम और गुप्तेश्वर पांडेय दोनों के नामों पर मंथन हुआ था लेकिन जीत पूर्व हलदार की हुई है. हालत यह हो गई है कि गुप्तेश्वर पांडेय के आंबेडकर चौक स्थित कार्यालय पर मातम सा पसरा हुआ है.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब पूर्व डीजीपी को राजनीति में धोखा मिला हो. इससे पहले भी उन्होंने वीआरएस लिया था और खाली हाथ रह गए थे. उस समय भी बक्सर सीट के लिए पुलिस की नौकरी को अलविदा कहा था. बात 2009 की है, तब गुप्तेश्वर पांडे ने आईजी पद से इस्तीफा दिया था और बक्सर से राजनीति में एंट्री करने के सपने देखे थे. लेकिन उस समय भी उनको झटका ही लगा था. 2020 में फिर उनको बक्सर के चक्कर में करंट लग गया. वहीं, परशुराम चतुर्वेदी किसान नेता भी हैं और वह किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं.

Postmortem रिपोर्ट: भाजपा ने बिहार की बक्सर विधानसभा सीट से पूर्व हवलदार परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दिया है. यहां से पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ​चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. उनकी जगह पूर्व हवलदार को तरजीह दी गई है.

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